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Showing posts from 2017

परिवर्तन

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आज सुबह होगी परिवर्तन की,                      समग्र रूपरेखा बदलेगी  चंचल मन की, अब पिछले प्रतिदर्श मिटाने है,                      उठना है और ऊठकर आदर्श बनाने है|            मैं बदला तो क्या बदला हूं,                    साथ में आओ अभी कई तूफ़ान उठाने है, मुझसे भली है बाते मन की,                     हम सबको मिलकर कुछ संपर्क बनाने है| आज करूंगा तुमसे कुछ बाते,                      खुद में इसमें उसमें फिर संबंध बनाने है, कविता में मंडित शब्दों को ढककर,   ...

इश्के संविधान

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मुहब्बत में ये विधि विधान हो जाए,                इश्क का भी इक संविधान हो जाए, इकरार हो प्रस्तावना में जिक्र का,                प्रेम सदन में इसका बखान हो जाए | पेंबदों पर ना जोर आजमाइश हो,                 हा- ना का इशारो में ऐलान हो जाए, नजरो के इशारेअनुच्छेद बन जाए,                 लबो की हंसी का अध्यादेश हो जाए | इश्क मुस्क का भी प्रश्न काल हो,                 छुप छुपाने का स्थगन प्रस्ताव हो जाए, अपवादो का शून्यकाल हो जाए,                 प्रियवर का साथी बेमिसाल हो जाए | अनुरागों का खुले में हो वाचन,       ...

जीवन

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जीवन इक अल्प सत्य है,                        अलंकार इस कविता का तत्व है, मिथक सत्य है इस रचना में,                       संधि समास विग्रह सर्व सत्व है| भिन्न भिन्न प्रसंग है जि...

शब्द

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शब्द व्यथा है अब अपने भी, अब आवेग पुराना क्यों है तरकश के अपने तीरों में अब आवेश पुराना क्यों है?            कवियो के भवसागर भी है,            व्यासकथा के महाद्वीपो में            फिर क्यों कविता प्यासी है            आशाओ के मधुशालो में, झंझावत है सपनो में फिर, खुशियो की आवाज सी है, उमंग भरे इन सपनो का फिर अहसास छुपाना क्यों हैं?           शब्द व्यथा है अब अपने भी,           अब आवेग पुराना क्यों है           तरकश के अपने तीरों में          अब आवेश पुराना क्यों है?                      रचनाकार- प्रभात जोशी "प्रभु" र

कविता तुम पर

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मै कहूं समर्पण तुझको या सुनाऊं कोई कहानी,            तुम मृग हो अरण्य की या फिर हो तरल हिमानी| अद्भुद् ओज विराजे तुम पर जैसे तृण पर बूंदें,         कैसे करूं कविता में वर्णन इन ...

मन दर्पण

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शब्द रचना करूं अर्पण,दिखाऊं कैसे तुझे मन दर्पण पथ विचलित करूं कैसे, कैसे बताऊं मनोरथ समर्पण|     गतिशील सा परिवर्तन प्रभंजन,रूका हुआ मन आपदा प्रबन्धन     स्वर्णिम युग सुर...