शब्द संहिता
आज ब्लाग जगत के भवसागर में गोते लगाने का मन हुआ यथार्त से साक्षात्कार के लिये व हाथ आजमाइश के लिऐ मन भ्रमर को साहित्य की बगीया में उङने को छोङ दिया। बाकी डुबती हुयी नाव की पतवार को आपके हवाले कर हिन्दी जगत में सूक्ष्म प्रवेश हेतु अर्जी आपकी सेवा में अभिन्नदित है ; विज्ञान के इस विद्यार्थी की परिकल्पना को प्रायोगिक रुप से सिद्ध करने में आपके विचार एवं सुझाव सदैव निम न् त्रित है। प्रभात जोशी "प्रभु" ...