परिवर्तन
आज सुबह होगी परिवर्तन की,
समग्र रूपरेखा बदलेगी चंचल मन की,
अब पिछले प्रतिदर्श मिटाने है,
उठना है और ऊठकर आदर्श बनाने है| मैं बदला तो क्या बदला हूं,
साथ में आओ अभी कई तूफ़ान उठाने है,
मुझसे भली है बाते मन की,
हम सबको मिलकर कुछ संपर्क बनाने है|
आज करूंगा तुमसे कुछ बाते,
खुद में इसमें उसमें फिर संबंध बनाने है,
कविता में मंडित शब्दों को ढककर,
कलमों से खोद भाव स्त्रोत दिखलाने है|
जनसंख्या को कर एकत्रित,
निज भावों के अभिनव संदर्भ बनाने है,
अब पिछले प्रतिदर्श मिटाने है,
उठना है और ऊठकर आदर्श बनाने है|
रचनाकार-
प्रभात जोशी'प्रभु'
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