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Showing posts from May, 2018

सफलता का सूत्र

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व्यक्ति का निर्णय निजी हो सकता है किन्तु व्यक्तित्व का निर्णय देश, काल एवं परिस्थिति के अनुरुप होता है| जीवन में सफलता के अग्र बिन्दु को प्राप्त करने के लिए सैद्धान्तिक से अधिक व्वहारिक निर्णय आवश्यक होते है| केवल अभिव्यक्ति को विचारो या शब्दों के माध्यम से व्यक्त करने से सफलता को प्राप्त नही किया जा सकता बल्कि आवश्यक है  वह सकारात्मक सोच एवं दृढ़ संकल्प जो एक स्थितिज ऊर्जा को रचनात्मक गतिद ऊर्जा में परिवर्तित कर एक स्वच्छ प्रतिबिम्बित पुंज निर्माण की कार्यदायी संस्था बन पाये|                                       प्रभात जोशी"प्रभु"

अामा और यादें

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विद्यार्थी जीवन/बेरोजगारी के उस दौर में 1000 का वो नोट होठों की मुस्कुराहट को उज्जवल करता था| आज अकारण ही मस्तिष्ककी यादों ने मन को भाव विभोर ओर प्रज्ज्वलित कर दिया| सोचकर अच्छा लगता है उन पुरानी यादों में एक नादानी सी छिपी होती थी|          स्मृति के दायरे आमा की यादों की परिक्रमा कर रहे हैं| ओ परभु  तु कभाड़ जन जाये बाट में ठुल डढा़की छू| पढ़ाई से लेकर ग्राम विकास अधिकारी प्रशिक्षण तक के उस दौर में एक खुराक आमा की डांट की होती थी| कभी फुर्सत मिलती तो आमा परभु(प्रभु) को टाइमपास के लिए भी हड़का देती थी|         गांव के घर का पटांगड़ अब सूना लगता है रौनक तो आमा की हाकाहाक (हल्ले) थी| बड़ी देर में समझ आया उम्र अब नादानी के उस दौर से काफी आगे निकल गयी है| पर जब आमा का वो नोट और आग्क रव्ट (आग की रोटी) ख्याल में आता है मन फिर लड़कपन में खो जाता है|    अब न आमा है ना हजार का नोट बस यादें है और आशीर्वाद जो उस लड़कपन को जीवन्त रखे हुऐ हैं|                       ...