इश्के संविधान
मुहब्बत में ये विधि विधान हो जाए,
इश्क का भी इक संविधान हो जाए,
इकरार हो प्रस्तावना में जिक्र का,
प्रेम सदन में इसका बखान हो जाए |
पेंबदों पर ना जोर आजमाइश हो,
हा- ना का इशारो में ऐलान हो जाए,
नजरो के इशारेअनुच्छेद बन जाए,
लबो की हंसी का अध्यादेश हो जाए |
इश्क मुस्क का भी प्रश्न काल हो,
छुप छुपाने का स्थगन प्रस्ताव हो जाए,
अपवादो का शून्यकाल हो जाए,
प्रियवर का साथी बेमिसाल हो जाए |
अनुरागों का खुले में हो वाचन,
और चाहत का भी हो इक निर्वाचन,
बेवफाई पर मुकदमा बन जाए,
रुसवाई पर भी हित याचिका हो जाए |
दिलजलो पर आयोग बन जाए,
सुधारों का इसमें भी प्रावधान हो जाए,
मुहब्बत में ये विधि विधान हो जाए,
इश्क का भी इक संविधान हो जाए||
रचनाकार-
प्रभात जोशी'प्रभु'
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