हिमालय की कलम से ( ग्राम कीमू, कपकोट की कहानी )
हिमालय की कलम से ( ग्राम कीमू, कपकोट की कहानी ) शब्दो का हिमनद अति हिमपात के कारण बहने को तैयार है और भावनाओं की झील में विस्फोट होने को उत्साहित है। आज हिमालय लिख रहा है अपने अनछुऐ पहलुओ को उजागर करने के लिऐ जो हिमनदो के इर्द र्गिद घूमते हुऐ दबे हुऐ हैं। हिरामणी, नामिक ग्लेशियर का पड़ोसी समुद्रतल से तकरीबन 2500 मी की ऊंचाई पर दानपुर (कपकोट,बागेश्वर ) परगने के बिचला दानपुर क्षेत्र का सबसे ऊंचाई पर स्थित ग्राम कीमू अपनी सुन्दरता के साथ ही परम्परा के लिऐ भी जाना जाता है। जिला मुख्यालय से तकरीबन 75 किमी सड़क दूरी पर एवं 4 किमी के दुलर्भ पैदल मार्ग को चुनौती देता यह गांव अपनी खुबसूरती और विरासत को सम्भाले हुऐ है। पधान को ओग देने की ब्रिटिश कालीन परम्परा नऐ प्रारूपो में आज भी जीवन्त हैं। नवम्बर से फरवरी तक प्रकृति का जब मन करता है इसे बर्फ की चादर ओढ़ा देती है। जेठ क...