कविता तुम पर

मै कहूं समर्पण तुझको या सुनाऊं कोई कहानी,
           तुम मृग हो अरण्य की या फिर हो तरल हिमानी|
अद्भुद् ओज विराजे तुम पर जैसे तृण पर बूंदें,
        कैसे करूं कविता में वर्णन इन नयनो के सागर काे
निखरा उजला जौवन शशि के लोचन नयन तुम्हारे
       तुम कुसुम मंजरी पुण्य प्रसून तुम हो नूतन नन्दिनी
चतुरानन की रचना हो तुम या रतिनाथ की कामिनी
       मै कहूं समर्पण तुझको या सुनाऊं कोई कहानी,
तुम मृग हो अरण्य की या फिर हो तरल हिमानी|

          रचनाकार- प्रभात जोशी 'प्रभु'
        
        

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