Posts

Showing posts from January, 2017

शब्द

Image
शब्द व्यथा है अब अपने भी, अब आवेग पुराना क्यों है तरकश के अपने तीरों में अब आवेश पुराना क्यों है?            कवियो के भवसागर भी है,            व्यासकथा के महाद्वीपो में            फिर क्यों कविता प्यासी है            आशाओ के मधुशालो में, झंझावत है सपनो में फिर, खुशियो की आवाज सी है, उमंग भरे इन सपनो का फिर अहसास छुपाना क्यों हैं?           शब्द व्यथा है अब अपने भी,           अब आवेग पुराना क्यों है           तरकश के अपने तीरों में          अब आवेश पुराना क्यों है?                      रचनाकार- प्रभात जोशी "प्रभु" र

कविता तुम पर

Image
मै कहूं समर्पण तुझको या सुनाऊं कोई कहानी,            तुम मृग हो अरण्य की या फिर हो तरल हिमानी| अद्भुद् ओज विराजे तुम पर जैसे तृण पर बूंदें,         कैसे करूं कविता में वर्णन इन ...

मन दर्पण

Image
शब्द रचना करूं अर्पण,दिखाऊं कैसे तुझे मन दर्पण पथ विचलित करूं कैसे, कैसे बताऊं मनोरथ समर्पण|     गतिशील सा परिवर्तन प्रभंजन,रूका हुआ मन आपदा प्रबन्धन     स्वर्णिम युग सुर...