शब्द
शब्द व्यथा है अब अपने भी, अब आवेग पुराना क्यों है तरकश के अपने तीरों में अब आवेश पुराना क्यों है? कवियो के भवसागर भी है, व्यासकथा के महाद्वीपो में फिर क्यों कविता प्यासी है आशाओ के मधुशालो में, झंझावत है सपनो में फिर, खुशियो की आवाज सी है, उमंग भरे इन सपनो का फिर अहसास छुपाना क्यों हैं? शब्द व्यथा है अब अपने भी, अब आवेग पुराना क्यों है तरकश के अपने तीरों में अब आवेश पुराना क्यों है? रचनाकार- प्रभात जोशी "प्रभु" र