परिवर्तन
आज सुबह होगी परिवर्तन की, समग्र रूपरेखा बदलेगी चंचल मन की, अब पिछले प्रतिदर्श मिटाने है, उठना है और ऊठकर आदर्श बनाने है| मैं बदला तो क्या बदला हूं, साथ में आओ अभी कई तूफ़ान उठाने है, मुझसे भली है बाते मन की, हम सबको मिलकर कुछ संपर्क बनाने है| आज करूंगा तुमसे कुछ बाते, खुद में इसमें उसमें फिर संबंध बनाने है, कविता में मंडित शब्दों को ढककर, ...