जीवन
जीवन इक अल्प सत्य है,
अलंकार इस कविता का तत्व है,
मिथक सत्य है इस रचना में,
संधि समास विग्रह सर्व सत्व है|
भिन्न भिन्न प्रसंग है जिसमें ,
कोटी भ्रमित जटिल परिभाषा है,
उन्नति का उत्तुंग शिखर है,
छणिक प्रेम सा एवं व्यग्र निराशा है|
मात्रा रहित दोहा यह जीवन,
व्याकरण बिन छंद है तनमन,
छणिक मधुर आवेश है इसके
अविरल निर्मल अभिलाषा है|
तृप्ति की संज्ञा है जीवन,
उम्मीदो का सर्वनाम है हर छन,
आशाओ की शीत लहर है,
इच्छाओ की गर्म हवा है|
पवनो का आवेग है जीवन,
वट वृक्ष सा ये जड़त्व है,
जीवन इक अल्प सत्य है,
अलंकार इस कविता का तत्व है||
रचनाकार-
प्रभात जोशी'प्रभु'
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